काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के साथ वाराणसी में घूमने की 7 जगहें

Jyotirlingas
November 2, 2026
Published By:admin
Kashi Vishwanath Temple

वाराणसी की गलियों में सुबह मंदिरों में बजती घंटियां, गंगा घाट पर जलते दीपक और हर-हर महादेव के जयकारे इस शहर को एक अलग पहचान देते हैं। उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के किनारे बसा वाराणसी भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक शहरों में से एक है। इसे काशी और बनारस के नाम से भी जाना जाता है।

देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करने आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मंदिर के अलावा भी वाराणसी में कई ऐसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थान हैं, जिन्हें अपनी यात्रा में शामिल किया जा सकता है?

यहां प्राचीन मंदिरों से लेकर प्रसिद्ध घाट और बौद्ध धर्म से जुड़े ऐतिहासिक स्थल तक देखने को मिलते हैं। अगर आप काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो अपनी यात्रा में इन 7 जगहों को भी शामिल कर सकते हैं।

इस लेख में जानेंगे कि वाराणसी में कहां-कहां घूम सकते हैं, इन स्थानों का क्या महत्व है और अपनी यात्रा को बेहतर तरीके से कैसे प्लान कर सकते हैं।

Table of Contents

1. काशी विश्वनाथ मंदिर – भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक

वाराणसी की यात्रा काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव स्वयं काशी में निवास करते हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।

मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। समय के साथ इस मंदिर का कई बार पुनर्निर्माण हुआ। वर्तमान मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में महारानी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था। मंदिर के शिखर पर सोने की परत चढ़ी हुई है, जिसके कारण इसे स्वर्ण मंदिर भी कहा जाता है।

मंदिर परिसर के आसपास का काशी विश्वनाथ कॉरिडोर भी देखने योग्य है। यहां से गंगा घाट तक पहुंचना पहले की तुलना में आसान हुआ है।

मंदिर में क्या खास है?

  • भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन।
  • काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की सुंदर बनावट।
  • मंदिर में होने वाली विभिन्न आरतियों में शामिल होने का अवसर।
  • गंगा घाट के पास स्थित होने के कारण घाटों तक आसानी से पहुंचने की सुविधा।

अगर आप पहली बार यहां जा रहे हैं, तो दर्शन से पहले मंदिर के प्रवेश नियम और आरती की बुकिंग की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट से जरूर जांच लें।

Kashi Vishwanath Mandir

2. मां अन्नपूर्णा मंदिर – अन्न और समृद्धि की देवी का धाम

काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के बाद मां अन्नपूर्णा मंदिर जाना एक अच्छा विकल्प है। यह मंदिर भगवान शिव के मुख्य मंदिर के पास स्थित है और मां अन्नपूर्णा को समर्पित है।

हिंदू धर्म में मां अन्नपूर्णा को अन्न की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा अपने भक्तों के घर में कभी अन्न की कमी नहीं होने देतीं।

मां अन्नपूर्णा से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब भगवान शिव ने संसार को माया बताया, तब माता पार्वती ने उन्हें भोजन का महत्व समझाने के लिए अन्नपूर्णा का रूप धारण किया था। इसी कारण मां अन्नपूर्णा को भोजन और पोषण की देवी के रूप में पूजा जाता है।

यहां क्या देख सकते हैं?

  • मां अन्नपूर्णा के दर्शन।
  • मंदिर की पारंपरिक बनावट।
  • अन्नपूर्णा देवी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को जानने का अवसर।

काशी विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा मंदिर पास-पास स्थित हैं, इसलिए श्रद्धालु दोनों मंदिरों के दर्शन एक ही यात्रा में कर सकते हैं।

3. काल भैरव मंदिर – काशी के कोतवाल के दर्शन

वाराणसी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में काल भैरव मंदिर का विशेष स्थान है। यह मंदिर भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित है। इन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान काल भैरव काशी की रक्षा करते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु उनकी पूजा करके सुख, सुरक्षा और आशीर्वाद की कामना करते हैं।

मंदिर का वातावरण भक्तिमय रहता है और विशेष दिनों में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

काल भैरव मंदिर क्यों जाएं?

  • भगवान शिव के काल भैरव स्वरूप के दर्शन करने के लिए।
  • काशी के कोतवाल से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को जानने के लिए।
  • वाराणसी के प्राचीन मंदिरों में से एक को देखने के लिए।

अगर आप काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करने जा रहे हैं, तो काल भैरव मंदिर को भी अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।

4. दशाश्वमेध घाट – गंगा आरती का अद्भुत दृश्य

वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों की बात हो और दशाश्वमेध घाट का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं है। यह गंगा नदी के किनारे स्थित शहर के सबसे प्रसिद्ध घाटों में से एक है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने इस स्थान पर दस अश्वमेध यज्ञ किए थे। इसी कारण इसका नाम दशाश्वमेध घाट पड़ा।

इस घाट की सबसे बड़ी पहचान यहां होने वाली शाम की गंगा आरती है। सूर्यास्त के बाद पुजारी बड़े दीपकों, धूप और मंत्रों के साथ मां गंगा की आरती करते हैं। घंटियों और शंख की आवाज के बीच यह दृश्य श्रद्धालुओं को काफी आकर्षित करता है।

दशाश्वमेध घाट पर क्या कर सकते हैं?

  • शाम की गंगा आरती देख सकते हैं।
  • सुबह गंगा नदी के किनारे का सुंदर दृश्य देख सकते हैं।
  • नाव की सवारी करके आसपास के घाटों को देख सकते हैं।
  • गंगा नदी के किनारे कुछ समय शांति से बिता सकते हैं।

अगर आप गंगा आरती देखना चाहते हैं, तो समय से पहले घाट पर पहुंचना बेहतर रहेगा, क्योंकि शाम के समय यहां काफी भीड़ होती है।

5. मणिकर्णिका घाट – मोक्ष से जुड़ी धार्मिक मान्यता

मणिकर्णिका घाट वाराणसी के सबसे पुराने और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण घाटों में से एक है। हिंदू धर्म में इसे मोक्ष से जुड़ा स्थान माना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि काशी में अंतिम संस्कार होने से व्यक्ति को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल सकती है। इसी कारण मणिकर्णिका घाट का विशेष महत्व है।

यहां लंबे समय से अंतिम संस्कार की परंपरा चली आ रही है। घाट को भारतीय जीवन दर्शन में मृत्यु और मोक्ष के विचार से भी जोड़ा जाता है।

मणिकर्णिका घाट का महत्व

  • हिंदू धर्म की अंतिम संस्कार परंपराओं से जुड़ा है।
  • काशी की प्राचीन धार्मिक मान्यताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • जीवन और मृत्यु के प्रति भारतीय आध्यात्मिक सोच को समझने का अवसर देता है।

यह एक सक्रिय अंतिम संस्कार स्थल है। यहां जाते समय स्थानीय लोगों और शोक में आए परिवारों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। बिना अनुमति फोटो या वीडियो नहीं लेना चाहिए।

Manikarnika Ghat at night in Varanasi

6. संकट मोचन हनुमान मंदिर – भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र

वाराणसी का संकट मोचन हनुमान मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है। यह शहर के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है और यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

इस मंदिर का संबंध गोस्वामी तुलसीदास जी से माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने इसी स्थान पर भगवान हनुमान के दर्शन किए थे और बाद में यहां मंदिर की स्थापना की।

मंगलवार और शनिवार को मंदिर में भक्तों की भीड़ अधिक रहती है। हनुमान जयंती के अवसर पर यहां विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन होते हैं।

मंदिर की खास बातें

  • भगवान हनुमान के दर्शन और पूजा।
  • मंदिर में मिलने वाला प्रसाद, खासकर लड्डू।
  • तुलसीदास जी से जुड़ी धार्मिक मान्यता।
  • हनुमान जयंती पर विशेष आयोजन।

अगर आप वाराणसी के प्रसिद्ध मंदिरों को देखना चाहते हैं, तो संकट मोचन मंदिर को अपनी यात्रा में जगह जरूर दें।

7. सारनाथ – जहां भगवान बुद्ध ने दिया था पहला उपदेश

वाराणसी से कुछ दूरी पर स्थित सारनाथ एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। यह बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष महत्व रखता है।

बौद्ध धर्म की मान्यता के अनुसार, ज्ञान प्राप्त करने के बाद भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया था। इस घटना को धर्मचक्र प्रवर्तन के नाम से जाना जाता है।

सारनाथ में कई प्राचीन स्मारक और ऐतिहासिक स्थान हैं, जो बौद्ध धर्म के इतिहास से जुड़े हैं।

सारनाथ में देखने योग्य प्रमुख स्थान:

  • धमेख स्तूप: यह सारनाथ का प्रमुख ऐतिहासिक स्मारक है और भगवान बुद्ध के पहले उपदेश से जुड़ा माना जाता है।
  • चौखंडी स्तूप: यह वह स्थान माना जाता है जहां भगवान बुद्ध अपने पहले पांच शिष्यों से मिले थे।
  • सारनाथ संग्रहालय: यहां प्राचीन मूर्तियां, ऐतिहासिक वस्तुएं और अशोक स्तंभ का प्रसिद्ध सिंह शीर्ष देखा जा सकता है।
  • मूलगंध कुटी विहार: यह बौद्ध धर्म से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।

अगर आप धार्मिक स्थलों के साथ इतिहास और संस्कृति में भी रुचि रखते हैं, तो सारनाथ आपकी वाराणसी यात्रा का एक अच्छा हिस्सा हो सकता है।

Sarnath Dhamek Stupa at the archaeological site in Varanasi

वाराणसी में 1 दिन और 2 दिन में घूमने का प्लान

वाराणसी में घूमने के लिए कितने दिन चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितने स्थान देखना चाहते हैं। अगर आपके पास सीमित समय है, तो पहले से यात्रा की योजना बनाना उपयोगी रहेगा।

एक दिन की वाराणसी यात्रा

अगर आपके पास केवल एक दिन है, तो आप मुख्य धार्मिक स्थलों को प्राथमिकता दे सकते हैं।

समयघूमने की जगह
सुबहकाशी विश्वनाथ मंदिर और मां अन्नपूर्णा मंदिर
सुबह के बादकाल भैरव मंदिर
दोपहरविश्राम और भोजन
शाम से पहलेमणिकर्णिका घाट
शामदशाश्वमेध घाट की गंगा आरती

एक दिन में सभी सात स्थानों को आराम से देख पाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए इस योजना में सारनाथ और संकट मोचन मंदिर को शामिल करने के लिए अतिरिक्त समय रखना बेहतर रहेगा।

दो दिन की वाराणसी यात्रा

अगर आपके पास दो दिन हैं, तो आप मंदिरों, घाटों और सारनाथ को बेहतर तरीके से देख सकते हैं।

पहला दिन:

  • काशी विश्वनाथ मंदिर
  • मां अन्नपूर्णा मंदिर
  • काल भैरव मंदिर
  • मणिकर्णिका घाट
  • दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती

दूसरा दिन:

  • संकट मोचन हनुमान मंदिर
  • सारनाथ
  • सारनाथ संग्रहालय
  • मूलगंध कुटी विहार

इस तरह आप वाराणसी के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थानों को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं। मंदिरों के दर्शन और स्थानीय यातायात के अनुसार समय में बदलाव हो सकता है।

वाराणसी जाने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

वाराणसी घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय अच्छा माना जाता है। इन महीनों में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहता है, जिससे मंदिरों और घाटों पर घूमना आसान होता है।

  • अक्टूबर से मार्च: इस समय मौसम सुहावना रहता है। आप सुबह मंदिरों के दर्शन और शाम को घाटों की सैर कर सकते हैं।
  • अप्रैल से जून: इन महीनों में गर्मी अधिक रहती है। इस दौरान सुबह जल्दी और शाम के समय घूमने की योजना बनाना बेहतर है।
  • जुलाई से सितंबर: इस समय बारिश होती है। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ सकता है, इसलिए घाटों पर जाने से पहले स्थानीय प्रशासन की सलाह और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

अगर आप देव दीपावली या महाशिवरात्रि के समय वाराणसी जाना चाहते हैं, तो पहले से होटल और यात्रा की व्यवस्था कर लें। इन अवसरों पर शहर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है।

Read More: Kashi Vishwanath | Lord Shiva’s Beloved

काशी विश्वनाथ मंदिर की यात्रा के लिए कुछ जरूरी बातें

पहली बार वाराणसी जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुछ छोटी-छोटी बातें यात्रा को आसान बना सकती हैं।

  • मंदिर में जाने से पहले दर्शन और आरती का वर्तमान समय जांच लें।
  • मंगला आरती या दूसरी विशेष आरतियों में शामिल होने के लिए आधिकारिक बुकिंग की जानकारी लें।
  • मंदिर परिसर में मोबाइल और अन्य सामान ले जाने से जुड़े नियम पहले पढ़ लें।
  • त्योहारों के दौरान भीड़ अधिक हो सकती है, इसलिए यात्रा में अतिरिक्त समय रखें।
  • घाटों पर स्नान करते समय सुरक्षा का ध्यान रखें।
  • बुजुर्गों के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो पैदल चलने की दूरी और आराम का समय ध्यान में रखें।
  • सारनाथ जाने के लिए अलग से पर्याप्त समय रखें।

क्या वाराणसी के साथ दूसरे ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भी कर सकते हैं?

कई श्रद्धालु केवल काशी विश्वनाथ मंदिर ही नहीं, बल्कि भगवान शिव के अन्य ज्योतिर्लिंगों और प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन भी करना चाहते हैं। ऐसे में वे अपनी यात्रा को एक बड़े तीर्थ यात्रा कार्यक्रम का हिस्सा बना सकते हैं।

उदाहरण के लिए, श्री शिव शंकर तीर्थ यात्रा की तीन धाम, ग्यारह ज्योतिर्लिंग, गंगासागर और अयोध्या यात्रा में वाराणसी भी शामिल है।

इस यात्रा के 25वें दिन श्रद्धालुओं के लिए गंगा स्नान, काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन, मां अन्नपूर्णा मंदिर और तुलसी मानस मंदिर के दर्शन का कार्यक्रम रखा गया है। इसके अलावा यात्रा में ओंकारेश्वर, महाकालेश्वर, सोमनाथ, द्वारिकापुरी, भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर और अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों को भी शामिल किया गया है।

यह यात्रा उन लोगों के लिए एक विकल्प हो सकती है जो एक ही कार्यक्रम में कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन करना चाहते हैं।

यात्रा की अवधि, प्रस्थान की तारीख, किराया और अन्य सुविधाओं की जानकारी के लिए तीन धाम, ग्यारह ज्योतिर्लिंग, गंगासागर और अयोध्या यात्रा का पूरा विवरण देख सकते हैं।

Read More: भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग: आस्था, इतिहास और आध्यात्मिक शक्ति का अद्भुत संगम

निष्कर्ष

वाराणसी एक ऐसा शहर है जहां हर गली, मंदिर और घाट का अपना धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के साथ मां अन्नपूर्णा मंदिर, काल भैरव मंदिर, दशाश्वमेध घाट और मणिकर्णिका घाट जैसे स्थान आपकी यात्रा को और खास बना सकते हैं। वहीं, सारनाथ में भगवान बुद्ध से जुड़े इतिहास को जानने का अवसर मिलता है।

अगर आप वाराणसी जाने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी सुविधा और उपलब्ध समय के अनुसार इन स्थानों को यात्रा में शामिल करें। और अगर आप काशी के साथ दूसरे ज्योतिर्लिंगों और प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन करना चाहते हैं, तो एक लंबी तीर्थ यात्रा की योजना भी बना सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. काशी विश्वनाथ मंदिर के पास घूमने की कौन-कौन सी जगहें हैं?

काशी विश्वनाथ मंदिर के पास मां अन्नपूर्णा मंदिर, दशाश्वमेध घाट और मणिकर्णिका घाट जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं। काल भैरव मंदिर भी वाराणसी के प्रमुख मंदिरों में शामिल है।

2. वाराणसी में घूमने के लिए कितने दिन काफी हैं?

वाराणसी के प्रमुख मंदिरों और घाटों को देखने के लिए 2 दिन का समय रखा जा सकता है। अगर आप सारनाथ और दूसरे ऐतिहासिक स्थलों को भी देखना चाहते हैं, तो अतिरिक्त समय रखना अच्छा रहेगा।

3. काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के बाद कहां जाना चाहिए?

काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के बाद मां अन्नपूर्णा मंदिर और काल भैरव मंदिर जा सकते हैं। इसके बाद दशाश्वमेध घाट और मणिकर्णिका घाट भी देख सकते हैं।

4. वाराणसी में गंगा आरती कहां होती है?

वाराणसी में दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती सबसे प्रसिद्ध है। यह आरती शाम के समय होती है और इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं।

5. क्या काशी विश्वनाथ मंदिर और मां अन्नपूर्णा मंदिर के दर्शन एक ही दिन में कर सकते हैं?

हां, दोनों मंदिर पास-पास स्थित हैं। इसलिए श्रद्धालु एक ही दिन में दोनों मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं।

6. वाराणसी से सारनाथ कितनी दूर है?

सारनाथ वाराणसी शहर के पास स्थित है और दोनों के बीच की दूरी आपके शुरुआती स्थान और चुने गए रास्ते पर निर्भर करती है। आप टैक्सी या स्थानीय परिवहन से सारनाथ पहुंच सकते हैं।

7. क्या वाराणसी के साथ दूसरे ज्योतिर्लिंगों की यात्रा भी की जा सकती है?

हां, आप एक बड़े तीर्थ यात्रा कार्यक्रम के माध्यम से वाराणसी के साथ दूसरे ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भी कर सकते हैं। इसके लिए तीन धाम और ग्यारह ज्योतिर्लिंग यात्रा जैसे विकल्प देख सकते हैं।

Do you have any questions?

Feel free to give us a call. We have a team of experts ready to answer all your queries. Thank you.

+91-9640100200

Popular Posts

Popular Categories

Devvrath Agarwal

Devvrath Agarwal

Director & Proprietor Shri Shiv Shankar Tirth Yatra

Devvrath Agarwal Ji is the Director and Proprietor of Shri Shiv Shankar Tirth Yatra, a trusted pilgrimage organization based in Rishikesh. Carrying forward a family legacy of over 50 years, he is dedicated to helping devotees experience India's most sacred pilgrimage destinations with comfort and care. With a background in business management and a deep respect for spiritual traditions, he combines professional expertise with a commitment to service. Through his work and writing, he aims to make pilgrimage journeys accessible, meaningful, and enriching for devotees from all walks of life.